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Tuesday, June 3, 2008

अंग्रेजी के अख़बार मना नहीं पाए 'रायल्स' की जीत का जश्न

आई पी एल की जीत का जश्न, राजस्थान से भोपाल तक ।
आई पी एल सीरीज़ मी बादशाहत कायम करने वाले पड़ोसी राज्य राजस्थान का जीत का जश्न भोपाल के अखबरों में भी देखा जा सकता है जून माह के दुसरे दिन के सारे अखबारों के पहले पेज पर राजस्थान की जीत का जयगान था राष्ट्रीय सहारा लिखता है रायल्स की शाही जीत,सुपर किंग्स परास्त इस समाचार को सहारा ने फ्रंट पेज पर एक फोटो स्क्रीन के जरिये प्रस्तुत किया गया पहला फोटो गौतम सेन के बायनेम लगाया है साथ ही समाचार की कमी को पुरा करने के लिए आई पी एल के धुरंधर में शेन वाटसन,यूनुस पठान,सोहेल तनवीर ,शान मार्श का जिक्र किया गया है बाकि विवेचन अन्दर स्पोर्ट्स पेज पर है द हिंदू समाचार पत्र ने मैच के रिजल्ट आने के बाद के फोटो का इंतजार नहीं किया इसने रैना,पार्थीव शिने फॉर सुपर किंग्स साथ ही उन्होंने ऑफ़ स्पिनर यूनुस पठान के द्वारा राजस्थान को प्रभावित करने का कहा गया है मगर यह समाचार शायद मैच के हाफ से पहले ही लिख दिया गया था इसलिए कहीं भी राजस्थान के जीतने का कोई चर्चा नहीं किया है इसके बावजूद की उन्होंने आधे पेज का कवरेज़ पुरी घटना को दिया पहले पेज पर पार्थिव पटेल का फोटो लगाया है जो जो के पिचुमानी का है इसी तरह हिंदू एन अन्दर के पेज पर भी वाही काम किया है जी विश्वनाथ के समाचार में लंच ब्रेक के बाद के मचा का कोई जिक्र ही नहीं है यहाँ तक की स्कोर भी हाफ से पहले का ही है और यहाँ पर जो फोटो है वह भी ब्रेक से पहले की टीम चेंनेई की बेटिग का ही है वास्तव में किसी भी अख़बार के लिए अच्छा नहीं माना जा सकता है ।

हिन्दी के हिंदुस्तान की स्थिति भी हिंदू से ज्यादा ठीक नहीं थी यहाँ भी पहले पेज पर आई पी एक की सूचना देती हुयी एक फोटो संतोष हरहरे की है जिसमे मुम्बई के डी वाई पाटिल स्टेडियम में रविवार को आई पी एल के फायनल मैच से पहले कार्यक्रम पेश करती अभिनेत्री शमीता शेट्टी वाही इस अखबार ने कम से कम अन्दर के इंडियन प्रीमियर लीग टी ट्वेंटी नाम के पेज पर समाचार में भी राजस्थान की जीत का कहीं कोई जिक्र ही नहीं था इसमे भी पहली टीम की परी के आधार पर ही सारा मशाला डाला गया है राकेश थपलीयल के मुम्बई से लिखे समाचार में चीनी की बेटिग को ही केन्द्र मन गया ऐसा शायद इसलिए हुआ क्योंकि समाचार मैच के ख़त्म होने से पहले ही लिखा जा चुका था डेड लाइन के प्रेसर में किसी ने मैच के ख़त्म होने का इन्तजार नहीं किया ।



अब बात हिंदुस्तान टाइम्स ने भी जयपुर की जीत का कोई सीध संकेत नहीं दिया है लीड है जयपुर ट्रीयुम्फ़ आनंद वसु की एक बाय लाइन न्यूज़ है जो एक सॉफ्ट स्टोरी मात्र है इसके पेकेज में आई पी एल के अच्छे के साथ साथ कई क्षणों को याद किया गया है प्रीति जिनता के हंसने, चीयर लीडर्स के नाचने को बेड और श्रीसंत को झापड़ को अग्ली बताया गया है बस यूनुस खान के बेटिग के फोटो और दोनों टीमों के फायनल स्कोर के अलावा यहाँ पर जीत का कोई संकेत नहीं है फूल कवरेज़ बारह पेज पर था मगर यहाँ भी स्पष्ट कुछ नहीं था जो जीत को स्तःपीत करने वाला हो ।


नवभारत ने लीड रखी है रायल्स आइपीएल किंग साथ मैं एक फोटो भी लगाया है दैनिक जागरण ने पहले पेज का आधा पेज समर्पित किया है शीर्षक लिखा है 'रायल्स' रीयली किंग इस समाचार में मेन ऑफ़ मैच, मेन ऑफ़ सीरीस और फेयर प्ले के साथ साथ विजेताओं को मिलने वाली राशि का ब्योरा भी दिया गया है इसके अलावा एक खड़ी फोटो रील में पहले सहित की अदाएँ ,सलमान के ठूमके और देशी पहनावे में आई आई पी एल की कमामेंतेटर और पूर्व क्रिकेटर समेत सभी पलों को पाठक के सामने पेश करने का प्रयास किया है ।


भोपाल एक अन्य अखबार राज़ एक्सप्रेस लिखता है कि राजस्थान रायल्स को आइपीएल का ताज यहाँ भी श्सेश समाचार को खेल पेज पर लगाया गया है मगर फ़िर भी अच्छा खासा विवरण पहले पेज पर रखा है जहाँ राजस्थान की जीत की झलक दिखाई देती है इस मामले में भोपाल के ही समाचार पत्र ने अपने मध्य प्रदेश समेत अपने पड़ौसी राज्य राजस्थान में फैले अपने संस्करणों को इस जश्न में शामिल करने का मौका मिल गया है दैनिक भास्कर ने फर्स्ट लीड आईपीएल रायल्स ने रचा इतिहास रखी है इस पत्र ने अपने पहले पेज के सात कलम में एक फोटो मिक्स ग्राफिक्स का लुफ्त उठाया है यहीं मैच के अवार्ड्स और राजस्थान रायल्स की टीम के वाच को ओवर बाय ओवर बताया गया है ।


इसके आधार पर हम ये कह सकते है कि राजस्थान की जीत का मज़ा इंग्लिश के समाचार पत्रों की तुलना में हिन्दी के समाचार पत्रों ने काफी ज्यादा उठाया है जैसे भोपाल हिदी अखबारों ने किया इसके पीछे का कारण है कि इंग्लिश के समाचार पत्र वास्तव में हिन्दी के समाचार पत्रों की तुलना में ज्यादा व्यापक क्षेत्र पर फैले हुए होते है उनकी डेड लाइन ज्यादा जल्दी होती जबकि अगर समाचार ज्यादा रिलेवेंट है तो हिन्दी के अखबर अपने पत्र को लेट भले कर लेंगे मगर आइपीएल जैसी महत्वपूर्ण न्यूज़ को मिस करना नागवारा समझा ।

Thursday, May 29, 2008

भास्कर का स्पोर्ट पेज पर नया प्रयोग

दैनिक भास्कर समाचार पत्र अपने नित नये प्रयोगों की वजह से जाना जाता रहा है और उन्ही प्रयोगों से उसने मीडिया में नए ट्रेंड बनाये है फ़िर वह मध्य प्रदेश हो या फ़िर राजस्थान अथवा गुजरात हर जगह नयापन ला दिया है।
अब पत्रिका के भोपाल से आरंभ होने के साथ ही भास्कर ने अपनी भास्कर लैब के नए नए प्रयोग करने आरंभ कर दिए है पहले अपने समाचार पत्र के सारे पेज कलर करने के बाद संडे भास्कर का कंटेंट और ले आउट बदलने के बाद अब भास्कर ने अपने स्पोर्ट्स पेज का खाका ही बदल दिया है। पहले जहाँ भास्कर में स्पोर्ट्स को कभी एक कभी डेढ़ पेज मिलता था जिसे अब बढ़ा कर दो पेज कर दिया गया है , साथ ही दोनों पेजों के बीच में मेग्जिन स्टाइल में फोटो लगना शुरू किया है। जो वाकई अपने आप में एक नवाचार ही कम से कम भोपाल के प्रिंट मीडिया हिन्दी और अंग्रेजी दोनों में।
भास्कर के सभी पेज रंगीन होने से पृष्ठ संख्या चौदह और पन्द्रह पर बीच में नीचे से दो कलम छोड़ कर इसे रखा जाता है। छब्बीस मई को बीजिंग के स्टेडियम में हुयी महिला दौड़ , सत्ताईस को फ्रंच ओपन टेनिस के पहले दौर में रिटर्न लगते हुए रोजत फेडरर तो अठाइस मई को यूरो कप की तेयारी करते हुए का फोटो लगाया गया है।
हालांकि अपने आप में ये अनूठा प्रयोग है लेकिन इसमे कभी कभी पाठकों को दिक्कत का सामना भी करना पड़ता है जब अखबार सही से मुड़ता नहीं है। फ़िर भी ले आउट के नजरिये से देखे तो नए दौर की शुरुवात का संकेत है।

Sunday, May 25, 2008

भोपाल में पत्रिका पहली नजर

भोपाल
कल रातको जब में अपने आशियाने को लौट रहा था तभी रस्ते में मुझे कुछ नयापन सा लगा।
मन किया कि जरा अपने दोस्त से कहूँ गाड़ी रोको और में इनसे पता कर लू आख़िर क्या हो रहा है ?
मेरे लिए भोपाल में केन्द्र का स्थान बन चुका बोर्ड ऑफिस चोराहा भी सजाया जा रहा था। मैं ये सब सोच ही रहा था की मेरे दोस्त ने बाइक रोक दी मेरे मन का चाहा हो गया। मगर इतना सहसा नही कर पाया कि वापस पीछे जाकर वहां काम करने वालों से कुछ पूंछ पाता ।
खेर मन मैं कहीं ये अंदाज तो था ही कि अगर ये मीडिया से जुड़े लोग कर रहे है तो शायद पत्रिका वाले ही कर रहे होंगे क्योकि हो सकता है। अगले दिनों में पत्रिका निकलेगा या फ़िर कोई बता रहा था कि भास्कर का संस्करण स्थापना दिवस आने वाला है उसकी तेयारी भी हो सकती थी, मन जानने को बेताब था मगर आलस्य सबसे बड़ी बीमारी होती है कुछ नही किया जा सका सब को कल पर दल दिया गया कि कल देखेंगे जो भी होगा। अभी तो घर चलो जो बात करो रात को खाना खाने के बाद के नींद आ गई तो सवेरे ही कुछ पाता चला. सवेरे हमारे यहाँ जो होकर आता है वो जनता था कि में राजस्थान से हूँ उसने हमारे रोजाना के पेपर के साथ पत्रिका भी डाल दिया क्योकि उसे शायद ये उम्मीद थी कि मैं तो उसका पक्का ग्राहक होऊंगा. जागते ही मेरे साथियों से पता चला कि पत्रिका भी आया है . जिज्ञासा से पेपर लेकर देखा कि क्या है जरा मैं भी तो देख लूँ सबसे पहले कि पंक्तियों के शुरुआत के दो चार शब्दों कों पढ़कर आगे पढने कि जरूरत ही नही पड़ी क्योकि बचपन से उसे ही तो पढ़ते आए है पंक्तियाँ वाल्तेयर कि थी हो सकता है मैं आपके विचारों से सहमत न हो पाऊ फ़िर भी विचार प्रकट करने के आपके अधिकारों कि रक्षा करूँगा -वाल्तेयर आगे लिखा था पत्रिका-य एषु सुप्तेशु जागर्ति . कुछ नहीं बदला बस यहाँ आकर राजस्थान का साथ छुट गया है पहले आवरण पर लिखा था सुप्रभात भोपाल धन्य हुए हम यहाँ आकर शीर्षक से पत्रिका के प्रतिनिधि के तौर पर शहर और प्रदेश कों एक संदेश था एक संबोधन था जिसके अंत मैं लिखा था जहाँ भी जायेंगे ,रौशनी लुटायेंगे किसी चराग का अपना मकां नही होता . ये तो थी पत्रिका कि बात मगर इसमे कुछ कुछ मेरे जैसा ही है मुझे लगा कि जैसे पत्रिका अपने कों भोपाल में आकर धन्य मन रहा है मैं भी इस शहर मैं आकर धन्य हो गया हूँ जीवन में पहली बार किसी अखबारों का इस तरह का माहौल देख रहा हूँ अगर किसी दुसरे शहर में होता तो ये सभी कभी नहीं देखा पता और नही इससे कुछ सीख पाता तो बस इस शहर से यही कहना है कि इसने क=मुझे बहुत कुछ सिखने कों दिया और नया नया मौका देता ही जा रहा है कि मैं सीखता चला जाऊ . बस इसी कारण से तो ये शहर अब अपना-सा ही लगने लगा है .

ओ आने वाले, जरा होशियार यहाँ के हम है ......

भोपाल
देश के दस राज्यों में अपने चालीस संस्करणों के जरिये दैनिक भास्कर का पत्रकारिता के क्षेत्र में बड़ा व्यापक और महत्वपूर्ण योगदान है। आज एक तरह से देखें तो भोपाल की तरह कई शहर है जहाँ लोगों को रत को नींद माय एफ एमके संगीत के शत आती है और सवेरे उनकी नींद भी इसी से टूटती है। दिन की शुरुआत दैनिक भास्कर या दिव्या भास्कर जैसे किसी समाचार पत्र से होती है। उनके साथ हर कदम पर भास्कर का दीदार होता है।
जब बात मध्य प्रदेश की हो तो ये इस समूह का अपना मूल प्रदेश है उसी प्रकार भोपाल इसका गृह स्थल।
भोपाल शहर के बदलते मीडिया हालातों में इस संस्थान ने भी अपने पत्र में कही बदलाव किए है जिनमे फ़िर छे वह शाहरूख खान को अथिथि संपादक बनाना हो, सारे पेजों को कलर बना कर मध्य भारत का पहला सम्पूर्ण रंगीन अखबार होने का दावा करना हो अथवा सन्डे भास्कर का पुरा ले आउट बदलना हो या कंटेंट को सॉफ्ट स्टोरी के रूप में पेश करने का नया अंदाज हो, ये सबकुछ भोपाल के मीडिया जगत की सरगर्मियों के मद्देनजर ही किया जा रहा है।
नए बदलावों और प्रयोगों के लिया जानाजाने वाला यह समाचार पत्र इस रविवार को भी नए स्टाइल के अन्दर दिखाई दिया। आज पहले पन्ने पर हार्ड स्टोरी के नाम पर महज गुर्जर आन्दोलन में मरे बीस लोगों की सिंगल कालमन्यूज़ है। पहली ख़बर के स्थान पर मिसाइल वुमन के नाम से जानीजाने वाली टाईसी थामस का त्रिभुवन का ख़ास मुलाकात नामसे इंटरव्यू है। पहले पेज पर ही अतिथि संपादक राजदीप सरदेसाई का विशेष सम्पादकीय है हेडिंग है पुनर्जीवित करना होगा लोगों का विश्वास। साथ ही इस पेज पर एक खुशखबरी है भोपाल के लोगों के लिए भास्कर के नए समाचार पत्र के बारे में।
इसी पेज पर एक और अतिथि संपादक की पसंद का आर्टिकल है योजना आयोग के फ़ूड विशेषज्ञ अभिजीत सेन का बी इन्वेंसन के साथ संजय मिश्र की .......तो सत्तर लाख लोगों को मिल जाती रोटी एक संदेश प्रधान स्टोरी है। स्टीमर की मांग के अनुरूप मानवता का संदेश देती हुयी न्यूज़ है जयपुर से। मदन के जयपुर से बताते है हिंदू म के आँचल में दर्द भुला रही है अरीना। ये इसी प्रस्तुति है जो आतंकियों के इरादों के घिनोनेपन और मानवता के महत्व को स्थापित करती है।
अगर हम ले आउट के आधार पर देखे तो भास्कर ने इस मामले में भी काफी नवाचार प्रयोग किया है। पेज को ऊपर तक भरने के साथ हर पेज पर समाचारों को कोर्नर से काटा है सामान्यता सभी पेजेस का आरंभ स्क्रीन के साथ हो रहा है और सबसे ज्यादा बदलाव स्पोर्ट्स पेज पर किया गया है चोतिस पेज के इस अख़बार में स्पोर्ट्स का बारह तेरह पेज एक बड़ा फोटो बीच में छपता है आज टेनिस कोर्ट का फोटो छापा है।
इस तरह के तमाम बदलाव इस शहर की पत्रकारिता के बदलावों को इन्गीत करता है। भास्कर समाचार पत्र प्रयोगिकता की वजह से काफी जाना जाता है चाहे अभी काफी हलचल हो रही ही किसी के लिए भास्कर के समक्ष चुनौती दे पाना मुश्किल है फ़िर भी किसी ने ऐसा कर दिया तो यह भी एक नई मीडिया सक्सेस स्टोरी होगी जो अपने आप में अनोखी होगी।

Tuesday, May 20, 2008

रह-रह कर याद आता है जयपुर

भोपाल
गुलाबी नगरी के हादसे को एक-एक कर दिन गुजरते जा रहे है उम्मीद है कि ये एक बुरी याद की तरह गुजर जाएगा, फ़िर भी बार बार हम चाह कर भी उसे भुलाने में नाकाम रहते है। आज के अखबारों को भोपाल में देखे तो पते की बात ये है कि आज भी उसका असर दिख जाता है।
द पायोनीर ने पाकिस्तान एट इट अगेन के नामसे लीड बनाई है साथ ही जयपुर के एस पी की इंदौर में पड़ताल को पहले पेज पर रखा है साथ ही बोटम में मिस इंडिया वर्ड पार्वती की ख़बर को रखा है।
एच टी ने हिंदुस्तान टाइम्स स्पेशल में जया श्राफ की स्टोरी से सिक्स पेक एब के दिवानो को चेतावनी दी है एक बड़ी ख़बर के तौर पर फायरिंग एट एल ओ सी अगेन जवान किल्ड को प्राथमिकता दी है ,साथ ही दिल्ली की जीत और सेमिफय्नल में जाने की उम्मीद और शाहरुख़ की उस जीत का जिक्र किया है जिसमे उन्हें खिलाड़ियों के साथ डगआउट में बैठने की अनुमति मिल गई है को पहले पेज पर स्थान दिया है।
द हिंदू ने भूकंप पीडितों को श्रृधांजलि का फोटो लगाया है और मल्फोर्ड की न्यूक्लीयर डील की उम्मीदों को स्थान दिया है टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने भारत की अन्हेल्थी वर्किंग कंडीशन पर और किंग खान की जीत को प्रमुखता दी है। जनसत्ता ने बुद्ध पूर्णिमा पर केप्शन फोटो पक फायरिंग और विजय तेंदुलकर के निधन के आलावा जयपुर हादसे के बाद अब लखनव जेल पर खुफिया निगाहों का जिक्र किया है। राष्ट्रीय सहारा अपने लीड पर क्रीम स्टोरी का पेकेज लगता है और वार्ता से पहले धधकी एल ओ सी को प्रमुखता देता है।
हिंदुस्तान बदरा निगोडे बरस गए थोड़े से दिल्ली में बारिश को पक फायरिंग के साथ स्टीमर में सॉफ्ट स्टोरी शाहरुख़ ने खोले गलियारों के जाम लगता है।
नव भारत ने एल ओ सी पर गोलीबारी और विजय तेंदुलकर के निधन के साथ डीजीपी के कार्यभार सँभालने की न्यूज़ को आधार बनाया है इसी प्रकार नवादुनिया ने बड़े फेरबदल की सुगबुगाहट के साथ छत्तीसगढ़ में क्रीमी लेयर का अधर माता पिता की आय को मानने के फैसले को प्रमुख वरीयता दी है। दैनिक जागरण बी यू की बीएड परीक्षाओं के रद्द होने के अलावा लीड स्टोरी में इंदौर से जुड़े जयपुर ब्लास्ट के तार के साथ कोल्कता नाईट राइडर का केप्शन फोटो लगाया है। राज एक्सप्रेस ने विजेता की होगी रत्न जडित ट्राफी, शाहरुख़ को राहत का संचार प्रधान और पटवारियों की थोक भरती डीजीपी के पदभार लेने के खबर को पहले पेज पर लिया है।
दैनिक भास्कर ने इन सब से हटकर बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर केप्शन फोटो बुद्धं शरणम गच्छामि लगाया है फिस्ट लीड कश्मीर पर बुश का दांव फ़िर नौकरियों का पिटारा क्यात्नाम नात्याकर विजय तेंदुलकर का निधन पन्ने पर रखा है अपने पेज पर सॉफ्ट स्टोरी के तौर पर स्टीमर में अब कुंवारे सेनिकों की शादी कराएगी वायु सेना से पेज को हल्का फुल्का बनाया है।
इस प्रकार लगता है की समाचारों में जयपुर का जिक्र अख़बारों से बंद होने का नाम नहीं ले रहा है ।